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।। कप्तानगंज में ‘सफेदपोश’ लापरवाही: टोल बचाने की भूख और सुविधा शुल्क का खेल, जनता बेहाल।।

।। नेशनल हाईवे नहीं, ये कप्तानगंज का बाजार है साहब! चंद रुपयों के लालच में दांव पर लगीं मासूम जिंदगियां।।

अजीत मिश्रा (खोजी)

।। भ्रष्टाचार के ‘शॉर्टकट’ ने कप्तानगंज को बनाया डेंजर जोन: टोल बचाने की जुगत में जान जोखिम में।।

बुधवार 28 जनवरी 26, उत्तर प्रदेश।

कप्तानगंज (बस्ती) ।। क्या कप्तानगंज की नगर पंचायत की संकरी सड़कें अब राष्ट्रीय राजमार्ग बन चुकी हैं? यह सवाल आज हर स्थानीय नागरिक की जुबां पर है। प्रशासन की नाक के नीचे “सुविधा शुल्क” के खेल ने शहर की शांति और सुरक्षा को ताक पर रख दिया है। टोल टैक्स के चंद पैसे बचाने के लिए भारी ट्रक और ट्रेलर रामजानकी मार्ग का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे नगर का हृदय स्थल ‘बीच बाजार’ हर वक्त हादसों के मुहाने पर खड़ा रहता है।

🔥जिम्मेदारों की ‘चुप्पी’ या ‘मौन सहमति’?

हैरानी की बात यह है कि जिले के आला अधिकारी इस पूरी अव्यवस्था से अनजान बने हुए हैं। या यूं कहें कि वे ‘अनजान’ होने का ढोंग कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि भारी वाहनों का यह प्रवेश बिना मिलीभगत के संभव नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, इन गाड़ियों को सुरक्षित रास्ता देने के नाम पर पर्दे के पीछे से “सुविधा शुल्क” की वसूली की जा रही है। अधिकारियों की यह अनदेखी किसी बड़े हादसे का निमंत्रण दे रही है।

🔥बाजार में लगा रहता है जाम का झाम

नगर पंचायत कप्तानगंज के बीच बाजार से जब ये विशालकाय गाड़ियां गुजरती हैं, तो घंटों तक पहिए थम जाते हैं। स्कूली बच्चे, एम्बुलेंस और स्थानीय दुकानदार इस कुप्रबंधन का दंश झेल रहे हैं। धूल, शोर और हादसों के डर ने व्यापारियों का व्यापार और आम जन का चैन छीन लिया है।

“क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है? अगर ये सड़कें भारी वाहनों के लिए नहीं हैं, तो इन्हें रोका क्यों नहीं जा रहा? जनता के टैक्स से चलने वाला सिस्टम आखिर जनता को ही परेशानी में क्यों डाल रहा है?”

🔥अनदेखी के पीछे का सच

जनता की समस्याओं को ठंडे बस्ते में डालना इस बात का प्रमाण है कि जिम्मेदारों के लिए जनहित से ऊपर ‘निजी हित’ हो गए हैं। रामजानकी मार्ग को एनएच (National Highway) की तरह इस्तेमाल करने की यह छूट कप्तानगंज की बुनियादी संरचना को भी तबाह कर रही है।

हमारा सवाल: क्या जिले के कप्तान और संबंधित विभाग इस अवैध रूट डायवर्जन पर लगाम लगाएंगे, या फिर “सुविधा शुल्क” का यह खेल इसी तरह सड़कों पर मौत बनकर दौड़ता रहेगा?

🔥टोल चोरी: भारी वाहनों द्वारा मुख्य मार्ग छोड़कर शहर के अंदर से जाना।

🔥प्रशासनिक विफलता: आला अधिकारियों की जानबूझकर की गई अनदेखी।

🔥भ्रष्टाचार का आरोप: सुविधा शुल्क की चर्चा को प्रमुखता से उठाना।

🔥जन सुरक्षा: बाजार में बढ़ते हादसों के खतरे का जिक्र।

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